कल्पनाशब्दों के बीच
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मौन

मौन...... सबको मृत्युपरांत दो मिनट का मौन देते हैं तुम्हें दो साल का मौन दे रखा है इससे ज्यादा कुछ है ही नहीं हम लाचारों के पास इस बुज़दिल ज़मी पर रहने से बेहतर हुआ तुम उस आसमान में खो गयी कुछ एक के लिए अब तक कराह रही हो बाकि सब के लिए तो कब की सो गयी . Nothing has changed . 😞😞😞😞😞😞
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें