भाषा / Language
गद्य लिखने का पहला प्रयास . त्रुटियों के लिए माफ़ी
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गद्य लिखने का पहला प्रयास . त्रुटियों के लिए माफ़ी.
जन्मदिन-------
आज भी जब भी उस कक्षा के कोने को देखती हूँ तो वो सहमा सा नितिन बैठा दिखाई पड़ता है . बरसो हो गए इस बात को जब मैंने रोते हुए नितिन को गोद में बिठा कर सिर्फ ये पुछा था की "रो क्यूँ रहे हो"? उसकी आँखों में एक खाली समुंदर दिखा जो अब बहते आंसूं से और रीता हुए जा रहा था .
सिलसिला शुरू हुआ उस बच्चे को समझने का . स्कूल में पहुँचते ही नजरे ,दिल ,दिमाग उस के साथ होने लगा और वो भी बंद नन्ही कली की तरह अब मुझमें खुलने लगा . मन की कहने लगा .
उस दिन मेरा जन्मदिन था. सभी बच्चों ने फूलों से मुझे शुभकामनाये दी और नितिन चुपके से एक पुराने पॉलीथिन में कुछ लाया और मेरे हाथ में थमा दिया . जिज्ञासा वश खोलके देखा तो उसमे एक पुरानी साडी और एक बड़ी लाल बिंदी का पैकेट था ,जिसमें दो तीन बिंदियाँ शेष रह गयी थी .नितिन बोला -" मैडम ये माँ की हैं. आप पहन लो ."उसकी इस मासूम इल्तिजा पर पहले बहुत प्यार आया और फिर कूट कूट के ममता भर गयी जब साथी शिक्षक ने बताया की नितिन की माँ का देहांत कुछ दिनों पहले कैंसर से हुआ है .
अब नितिन इंजीनियरिंग कर रहा है . और आज फिर मेरे जन्मदिन पर कॉल कर के कहेगा "हैप्पी बर्थडे माँ ".
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें