मुद्दतें हो गयी इश्क का आंखरी खत पाकर आज भी गीले हैं वो अलफ़ाज़ संग मेरे उम्र बिताकर
रचना 003814 अप्रैल 2014भाषा / Languageहिन्दीEnglishमुद्दतें हो गयी इश्क का आंखरी खत पाकर✦मुद्दतें हो गयी इश्क का आंखरी खत पाकर आज भी गीले हैं वो अलफ़ाज़ संग मेरे उम्र बिताकरकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें