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रचना 0038

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मुद्दतें हो गयी इश्क का आंखरी खत पाकर

मुद्दतें हो गयी इश्क का आंखरी खत पाकर आज भी गीले हैं वो अलफ़ाज़ संग मेरे उम्र बिताकर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें