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रचना 0039

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ज़िन्दगी का मुसलसल सफ़र

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ज़िन्दगी का मुसलसल सफ़र इक मंजिल छू कर अगली की डगर मुश्किल हालात .....चलो बढे कभी तुम लड़ो कभी तुम्हारी नेकी लड़े
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें