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रचना 0036

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दिल चाहे भरा हो ,इक कोना तो खाली है

दिल चाहे भरा हो ,इक कोना तो खाली है जहाँ तूने याद को ,सलीके से धरा होगा बेशक तू मशहूर है लूटने के फन में मुझे तो वही पायेगा ,जो मुझसा खरा होगा वीरानियों से ऊब गयी ,नया घर चाहिए सिर्फ एक कमरा ,जो दोस्तों से भरा होगा इस आस से माँ ने ,सींचे रखा था ठूँठ पोंधा छाँव ना दे ,लगाव ही देगा ,जब भी हरा होगा अपने से कहते रहे ,बस अपनी ही सुनते रहे कुछ इशारा तो ,गूंगी तन्हाई ने भी करा होगा मुहब्बत का शायर है वो ,बस नाम भर का इश्क उसका तो ,हर ग़ज़ल के साथ मरा होगा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें