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रचना 0035

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गर "मैं "को "तुम "की फ़िक्र हो जाये

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गर "मैं "को "तुम "की फ़िक्र हो जाये "तुम "को "मैं "पर फक्र हो जाये खुदा कसम ....."हम" रिश्तों के बादशाह हो जाएँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें