भाषा / Language
क्या हुआ गर
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क्या हुआ गर .......
दिल तक पहुँचने का
रास्ता लम्बा है दिलबर ?
सुकून से वक़्त लगाता हुआ आ
इस क़द्र खुद को थकाता हुआ आ
राह को पनाह से मिलाता हुआ आ
वापसी की गुंजाईश मिटाता हुआ आ
मेरे नाम को नया पता लिखाता हुआ आ
यहीं मिलूंगा ,ऐसी रट लगाता हुआ आ
आखरी सफ़र में हूँ
सब को फक्र से बताता हुआ आ
गम ना कर........
कम समय में दिल में उतरने वाले लोग
कम समय में दिल से उतर भी जाते हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें