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रचना 0028

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पहले नींद ले चुका .....अब ख्वाब मांगता है

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पहले नींद ले चुका .....अब ख्वाब मांगता है बूँद बूँद निचुड़ गयी ...अब वो बरसात मांगता है छल जाती हूँ ,छलती नहीं ......सादगी है दिल हर बार ......नयी खुराफात मांगता है हर पल धड़कता है ......दिल ठिठकता नहीं बस उसे देख रुकने के..... चंद लम्हात मांगता है दिल उड़ेल दिया ......जिगर खाली है इश्क़ा है ....रत्ती भर जज़्बात और मांगता है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें