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रचना 0026

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होली में

होली में ....,,, आओ थोडा द्वेष धुला लो मल मल सारा क्लेश धुला लो होली में पिचकारी में जीवन भर लो ख्वाबों की बौछार लगाओ होली में खुशियों का टीका लगवा लो मांग सुकून पिया से भरा लो होली में गुब्बारों में मुस्कानें भर लो कस कस सब पे आज मारो होली में भंग न पीओ मस्ती पीलो उमंगों के पकोड़े खा लो होली में जज़बातों की गुझिया तल लो एक नहीं दो चार खिला लो होली में हाथों में विशवास लगा लो मुख पर सबके खूब लगा लो होली में मुस्कानों की हौदी भर लो सभी ग़मों को धक्का मारो होली में
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें