ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0025

भाषा / Language

हम इस गुरुर में थे

✦
हम इस गुरुर में थे ..... की हमने वक़्त बदल लिया किवाड़ धकेलता वक़्त बाहर निकल आया अंगड़ाई लेता बुदबुदाया जरा जाकर आइना तो देख पहला कैसा लगता था , अब कैसा हो गया ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें