भाषा / Language
हम इस गुरुर में थे
✦
हम इस गुरुर में थे .....
की हमने वक़्त बदल लिया
किवाड़ धकेलता वक़्त
बाहर निकल आया
अंगड़ाई लेता
बुदबुदाया
जरा जाकर आइना तो देख
पहला कैसा लगता था ,
अब कैसा हो गया ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें