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एक होना वो जो हुआ नहीं

एक होना वो जो हुआ नहीं , एक होना वो भी जो है ही नहीं। एक होना वो जो कहा नहीं , एक होना वो भी जो सुना नहीं । एक होना वो जो गया नहीं , एक होना वो भी जो लौटा नहीं । एक होना वो जो लिखा नहीं , एक होना वो भी जो पढ़ा नहीं । एक होना वो जो दिखा नहीं , एक होना वो भी जो देखा नहीं । एक होना वो जो छुआ नहीं, एक होना वो भी जो अन छुआ नहीं l एक होना वो जो मन नहीं , एक होना वो भी जो मन का नहीं । एक होना वो जो तुम नहीं, एक होना वो भी जो तुम्हारा नहीं। प्रेम होने न होने के बीच का सेतु हुआ। हम तुम उस होते और नहीं होते के मध्य में टिके दो छोर हुए। प्रेम झोली में गिरता रहा सार्थक निरर्थक अथक।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें