भाषा / Language
प्रेम में अपने लिए स्वार्थी होना ही चाहिए तभी उस के प्रेमी…
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प्रेम में अपने लिए स्वार्थी होना ही चाहिए तभी उस के प्रेमी की पात्रता सिद्ध होती है।
*अभी नहीं बरसों बाद लौटूंगी....
मैं याद नहीं कल्पना हूं।
सुख पर नहीं....
मेरे दुःख पर तुम्हारी मिल्कियत है।
मेरे पास खालिस आंसुओं के अलावा और कुछ भी नहीं तुम्हारे लिए। मैं चुप हो गई हूं।
एक दुःख ढोया जा सकता है ....
ताउम्र
*मेरी आंखों ने चुना है *तुमको*
दुनिया देखकर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें