भाषा / Language
तुम्हारी आंखें.....क़फ़स है मेरा
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तुम्हारी आंखें.....क़फ़स है मेरा...
उसने कहा।
अच्छा... मैंने मुस्कुराते हुए कहा
तो लाओ मेरा क़फ़स भी दो मुझे।
उसने अपनी कविता की किताब पर अपना ही नाम लिख कर मुझे दे दिया।
शुक्रिया क्या कहती...
क़फ़स भीगता रहा...
उसका भी
मेरा भी
शुभरात 💕
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें