भाषा / Language
थकान
✦
थकान.....
*सुनने का मन बनाओ तो कहूँगी ....
मैं थक गई हूं ....बनते बिगड़ते
*अक्सर थक जाती हूँ...तुम्हें ढूंढते हुए
फिर तुम मिल जाते हो.....
किसी और पते पर
किसी और के कागज़ पर
काला जादू बिखेरते हुए।
क्या करूँ....
हंस देती हूं।
मैं फ़िर भर जाती हूँ उस प्रेम से जो कम पड़ गया इस दफ़े और पिछली दफ़े भी
*मेरी थकान प्रेम में सूखे फूलों सी है।
असीम ....अज़ीज़ अथक....अंतिम
*मैं थक गई तो कौन पूछेगा.. तुम कैसे हो?
*तुम मुझे अब नकार नहीं सकते....
तुम उग आए हो मुझमें ...कंटीली घास की तरह।
मुझे ये वाली थकान ही चाहिए।
*राहत आसान थी पर मैंने उस मन का प्रेम चुना जो मेरे लिए मूक था।
राह नहीं ....
मुझे राही पसंद था ....
कभी सोचना....मैं कितना थक जाती हूँ
😊😊😊
*तस्वीर २००७ की है। उम्र से बस एक शिकायत है ....हम अपनी मासूमियत पर कील ठोक कर रख नहीं पाते। वो ठोस हो जाती है... चेहरे पर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें