कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4490

भाषा / Language

तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए

तुम मेरे हिस्से में उतने ही आए.... जितनी एक हथेली में आ सकती है रेत जितनी एक मुठ्ठी में आ सकती है बारिश जितना एक आगोश में आ सकता है पहाड़।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें