कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4466

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मनके मन के...तुम्हारे लिए।

*मनके मन के...तुम्हारे लिए। तुमसे लौट नहीं सकती .....बस अब कहना, जताना और दुखना भूल गई हूं। मां की बात याद आती है कि अगर खर्च नहीं हो रहा तो संचय करती रहो ..... हमेशा बहना ही सुंदर नहीं होता कमल ठहरे पानी में ही खिलते हैं । रूक जा। कमल तोड़ने वाला खुद उतरेगा .... अगर चाहेगा बहना। प्रेम और प्रेमी का लौटना तय नहीं होता बस तुम मत टूटना ... तोड़ने से पहले।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें