भाषा / Language
इश्क़ तिलिस्म पूरी हुई
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इश्क़ तिलिस्म पूरी हुई...
इश्क़ में डूबी लड़की ने इश्क़ से ही इतरां को बनाया ....सजाया और खुद मिटा भी दिया।
टीस महसूस हुई ....पूजा उपाध्याय
देर तक।
तुम्हारे चाहनालोक को खूब दुआएं।
आबाद रहे।
सुंदर किताब के लिए खूब प्यार।
मोक्ष के डायलॉग्स किलिंग लगे ।
मोक्ष की आंखें कोई नहीं भूल सकता....राख रंग सरीखी
इश्क़ का रंग सफ़ेद रहे और इश्का गहरा नीला।
कहीं कहीं किताब रूह में बस गई। किताब की बहुत सारी पंक्तियां मार्क की हैं।
जब कभी उदासी छाएगी पढ़ लूंगी।
लिखती रहो।
हंसती रहो।
अगली किताब का इंतजार रहेगा।
किताब महकती रहे।
एक बात और...मुझे *चिट्ठी* शब्द से प्यार हो गया है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें