भाषा / Language
तू है तो मुझे फिर और क्या चाहिए
✦
तू है तो मुझे फिर और क्या चाहिए.....
कभी मैं एक बुलबुल हूं जो चुलबुल है ...
कभी मुझमें एक चुलबुल है जो बुलबुल हुई जाती है।
*अक्सर हम खुद को दूसरों की नजरों से ताड़ते हैं ... दूर से
बस यहीं बिखर जाते हैं।
आज खुद को पलकों में छिपाकर देखा
जाना कि पास ....और पास ...और
पास क्या होता है।
तू है तो मुझे फिर और क्या चाहिए...
बेहद प्यारा गीत.... सुनिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें