कल्पनाशब्दों के बीच
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वो जो भी चीज दुनिया में सिर्फ़ एक है और बस एक ही बार हुई ..…

वो जो भी चीज दुनिया में सिर्फ़ एक है और बस एक ही बार हुई ....बस वही तुम हो मेरे लिए। और जब हो गए तो पलट कर "नहीं" कैसे हो पाएंगे। मेरी आसक्ति में तुम थे और अनासक्ति में तुम ही खूब सारा नहीं रहोगे। आबाद रहिए मेरे "नहीं " में भी। *तस्वीर आज शाम की है। याद का रंग नीला... गहरा नीला है । रंगत तुम्हारी दी टूट की है और नूर मेरी जिद्द का।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें