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प्रेम एक मखमली सिरहाना ही नहीं एक बेहद चटकीला मोरपंख भी है…

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प्रेम एक मखमली सिरहाना ही नहीं एक बेहद चटकीला मोरपंख भी है जो मेरे और तुम्हारे बदन पर अपना रंग छोड़ता जाता है। याद महावर और मेहँदी है जो छूटने के लिए ही बनी है। प्रेम और याद.... मोह के धागों से बना यह पुल अटूट है। *तस्वीर कल की है ....मुस्कान तुम्हारी दी हुई।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें