कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4433

भाषा / Language

प्रेम एक मखमली सिरहाना ही नहीं एक बेहद चटकीला मोरपंख भी है…

प्रेम एक मखमली सिरहाना ही नहीं एक बेहद चटकीला मोरपंख भी है जो मेरे और तुम्हारे बदन पर अपना रंग छोड़ता जाता है। याद महावर और मेहँदी है जो छूटने के लिए ही बनी है। प्रेम और याद.... मोह के धागों से बना यह पुल अटूट है। *तस्वीर कल की है ....मुस्कान तुम्हारी दी हुई।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें