कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4432

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तुम्हें हूबहू रख लिया

तुम्हें हूबहू रख लिया.... तुम्हारे विकल्प नहीं रखे न मन ने न अखियन ने उसे चुनो ......जिसे सुन सकते हो उंगलियों से
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें