भाषा / Language
प्रेम सबसे पक्का सुर है
✦
प्रेम सबसे पक्का सुर है
कच्ची प्रार्थनाओं में गाया जाने वाला।
आस्था का कोई मोल नहीं होता।
जैसे ईश्वर मेरे एकांत का आधा हिस्सा है तुम मेरे शोर के पूरे हकदार हो।
तुम्हारे दर पर कुम्हलाने का अपना सुख है। तुमको अगर बसंत कहा है तो ये मेरी नियति होगी की पतझड़ का मेरा आखरी पत्ता भी तुम्हारी ही मिट्टी पर पड़ेगा। पीठ के पीछे मिलूंगी ... आती उम्र की ढलानों में। एक दुःख ढोया जा सकता है उम्र भर।
तुम मुझे फूंक मार कर नहीं उड़ा सकते। तुम्हारा मन मुझे छलने की इजाज़त नहीं देगा।कभी न कहेगा कि तुमसे प्रेम है। ईश्वर हो कहां पाता है किसी का ?
फिर मेरा कैसे हो?
मैंने इतना सा ही तुम्हारा प्रेम अपनी अंजुरी में भरा है जिससे मैं खुद मुक्त हो सकूं।
अपनी ही प्रार्थना के पार जा सकूं।
तुमको शुक्रिया कह सकूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें