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मैं अक्सर सोचा करती थी कि क्या मैं उससे ज्यादा मांग लेती हू…

मैं अक्सर सोचा करती थी कि क्या मैं उससे ज्यादा मांग लेती हूं? और ऐसा क्यूं है कि उसी से मांगती हूं। एक रोज़ मुझे पहाड़ों में एक सूखा नौला मिला । हाथ में पानी की बोतल होते हुए भी मेरे मन में आया काश इसका जल मेरे लिए न सूखा होता। नौले ने मेरी आवाज सुन ली।तभी दूर से एक पहाड़ी गूंज मुझसे टकराई और बोली.... तुम गलत समय में गलत लोगों से सही चीजों की चाहना करती हो। प्रेम में भी यही हाल है तुम्हारा। बंजर लोगों से भीगना चाहती हो। मैं कैसे भीग जाऊं अभी तुम्हारे लिए? नौले की बात सुनकर मैं दुख गई। पर मेरे मन ने कहा .... तुम हमेशा से जानती हो जिस से मांग रही वही तुम्हारे काबिल है। तुम वो देख महसूस लेती हो जो होता हुआ नहीं दिखता। ये 5D की बातें हैं । You can feel the vibrations. मुझ पर भरोसा रखो। मैं तुम्हें गलत चुनने नहीं दूंगा। तुमने अपने लिए जिसे चुना वही एक रोज़ तुम्हारा सा होकर तुम्हारे पास आएगा। बस धैर्य रखो। जाने क्यों हाथ में रखी बोतल के पानी को मैंने नौले पर अर्पित कर दिया और फिर झुककर उसी जल की कुछ बूंदों को जमीन से उठा कर माथे से लगा लिया।मुझे लगा नौला एक पल के लिए ही सही सिर्फ़ मेरे लिए जल से भर गया। तुम को भी यही कहूंगी.... मेरे दिल को पता है ... तू यहीं है...यहां है। Soul connections never lie. *जब तक मन है .....मैं हूं और अगर मैं हूं तो तुम तो हो ही मेरे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें