कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4416

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एकांत,बैचैनी और वो एक जरूरी शख्स कभी नहीं मिलेंगे।

एकांत,बैचैनी और वो एक जरूरी शख्स कभी नहीं मिलेंगे। तुम्हें खुद बनाने पड़ेंगे। अपने लिए। *आवाज़ में भी पड़ गई हैं दरारें कहो तो ... आज तुम्हें क्या कह कर पुकारें ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें