कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4409

भाषा / Language

मुझे आज भी उसकी आंखों ने बांध रखा है ।

मुझे आज भी उसकी आंखों ने बांध रखा है । वो तो कब का छूट गया मुझसे। अब मुझमें आसमान कम परिंदे ज्यादा हैं। शुभरात 💕
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें