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तुमसे प्रेम करने की एक वजह ये भी रही कि मुझे खुद को फिर फिर…

*तुमसे प्रेम करने की एक वजह ये भी रही कि मुझे खुद को फिर फिर गुम करके फिर फिर पाना था। मेरे पास सबकुछ था मेरे अपने सिवा। तुमने बस वही दिया ।मैंने भी तुमसे वही लिया। लेना देना खोना मिलना अगर प्रेम है तो हो.... तुम प्रेम ना भी रह सको तो मेरे लिए परे रह जाना। सबसे परे... *कैसे कहूँ.... बेवक़्त दिखती चीज़ें मुझे हैरान करती हैं... दिख जाइये ना *आसमां से उतार कर ढँक दिया है चाँद... वो आता रहे और तुम न आओ ये भी कोई बात है? आ जाओ *अगर प्रेम न भी होता तब भी हम बस एक दूसरे को दो वस्तुओं की तरह तक रहे होते.... है ना? *अपने ही ख़त अपने पते पर भेज कर देखिए एक रोज़.... मेरी उदासी मेरे इंतज़ार तक पहुंच जाइयेगा *बुद्धू... तस्वीर ही तो है मेरी तुम्हारा आईना नहीं पलकें झपका भी लो 😊😊😊 लिखना आसान होना होता है ....हो जाती हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें