भाषा / Language
उस असीम ख़ामोशी को छूना
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उस असीम ख़ामोशी को छूना....
वो भी शब्दों से .....
या तो सिर्फ मैं ही कर सकती हूँ
या सिर्फ तुम ही समझ सकते हो
आदत..
मेरा तुम्हारी तरफ और तुम्हारा मेरी तरफ लौट लौट कर आना।
इसमें ...
कौन ?
क्या?
कब?
कैसे?
क्यों?
कितना ?
कितनी देर में?
मायने नहीं रखता।
आदत हो जाती है बिना प्रश्न बिना उत्तर वाली।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें