भाषा / Language
दुनिया हमारे आगे चाहे मुस्कुराती हो पर पीछे हँसती है
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दुनिया हमारे आगे चाहे मुस्कुराती हो पर पीछे हँसती है....
अपनी बखिया खुद उधेड़ा कर कल्पना
नोंक न खोजा कर
खुद रफूगर बन
सीख पैबंद लगाना
सुख पर दुःख का
दुःख पर सुख का
सीख दुःख सुख सजाना ।
याद रख...
दुनिया हमारे आगे चाहे मुस्कुराती हो पर पीछे हँसती है....
तू हंसती रह ।
दुनिया के आगे भी ...
दुनिया के पीछे भी।
सदा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें