भाषा / Language
जिन आंखों में प्रेम देखना चाहो और अपने लिए अस्वीकृति देखो त…
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जिन आंखों में प्रेम देखना चाहो और अपने लिए अस्वीकृति देखो तब भी ....
जी भर करो प्रेम ।
अपनी आंखें मूंद लो ।
*बेहद मर जाने के बाद ये अंदाज़ा लगा कि हम एक इंसान पर ही ख़्वार होते हुए अच्छे लगते हैं और वो तुम हो।
तुम्हें मैं मुबारक
प्रेम और प्रार्थना अपने लिए होती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें