भाषा / Language
अभी बाज़ार को जाते हुए मैंने मां से कहा ये जो हमारे रास्ते…
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अभी बाज़ार को जाते हुए मैंने मां से कहा ये जो हमारे रास्ते के तरफ हमारे आम के पेड़ों में छोटे छोटे आम आए हैं ये बचेंगे क्या? ये तो लोग ही तोड़ लिया करेंगे...है ना?
मां ने कहा.. हां जितना भी कमाओ उगाओ उसका दस प्रतिशत दूसरों का होता ही है। उसे होने दो।
मां.... मेरी मां
ऐसा ज्ञान मां ही दे सकती है बातों बातों में। गांठ बांध ली मैंने भी। तस्वीर बस अभी की है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें