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पल में तोला पल में माशा

पल में तोला पल में माशा.... इसको अंग्रेजी में ghosting कहते हैं । आप कहेंगे ghost तो भूतिया सा कुछ हुआ..... ये ghosting क्या है? ये एक अदा है ।एक आदत या एक तरीका कह लो to ignore and get the attention required.This is a style to develop lots of insecurities in others and to keep oneself above on cloud nine . To act like a friend before and stranger the very next moment to make you feel worthless. ऐसे लोगों की एक अजीब आदत जो दो चेहरे लिए फिरते हैं । एक व्यक्ति का In चेहरा और उसी का out चेहरा। जब वन टू वन होते हैं ... और वो आपके साथ अकेले होते हैं तो बिल्कुल शुद्ध तम रूप में होते हैं ।आप से बिल्कुल नॉर्मल behave करते हैं ।आपके दोस्त,आपके सखा ,आपके जानकार ,आपके राजदार सब बन जाने को तैयार। आपको ये फील देते हुए कि आप और वो emotionally जुड़े हुए हैं। विश्वास बोया जा चुका है।एक सहृदय व्यक्तित्व जो मूल्यों को तवज्जो देता है। आपका मान करता हो..ऐसी सारी उम्मीदें आप में जगा देते हैं। आप उसे जिंदगी में in मानकर खुश रहने लगते हैं। फिर एक रोज आप भीड़ में उसी चेहरे को मिलते हैं ।आप हाथ बढ़ाते हैं तो वो कदम दूसरी और बढ़ा देता है। आपको बार बार बार बार अपनी पहचान बताने के लिए मजबूर करता है। सामने खड़े अजनबी को गले लगते हुए आप से आपका नाम पूछता है। ये जताता है कि तुमको देखा है कहीं ... याद नहीं आ रहा। आपसे आंख तक मिला कर बात नहीं करता। एक दीवार खड़ी कर देता है।आप को दिग्भ्रमित कर देता है। आप अवाक रह जाते हो। आप in वाले चेहरे को देखकर out वाले आदमी से मिलते हो। आपको लगता है ये अजीब क्यों बर्ताव कर रहा । क्या मुझसे कोई गलती हुई। क्या ये वही है जो मित्र था ।आपको इग्नोरेंस के पहाड़ तक ले जाकर नीचे धकेल कर भीड़ में चहकता फिरता है। Astonishment,cheating,sadness,low self esteem,self doubt , regret जैसे जाने कितने ही अंग्रेजी के शब्द दिमाग में हथौड़े मारने लगते हैं। लगता है किसी ने चीर हर लिया। बिना गलती के सजा पाना इसे कहते हैं। आप निराशा की गर्त में वहीं खड़े खड़े गिर जाते हो। सोचते हो .... मैं गलत जगह हूं या ये कोई भूत खड़ा है मेरे सामने। फिर शुरू होता है साइलेंट ट्रीटमेंट .... एक लंबी चुप्पी। आप खोह में चले जाते हो। अवसाद, उदासी और एकांत में ये बूझने कि ....ये क्या था? ये कौन था? वो पहले वाला कौन था? मैं कौन हूं? Self confidence हिल जाता है। आपको खुद को समेटने में वक्त लगता है। *ये ghosting एक नेगेटिव trait है। पहचानो ...अपने आसपास। अगर कभी दो किरदारों को एक चेहरे में चिपका हुआ देखो तो उसी पल छोड़ देने का निर्णय लो। छोड़ने का मतलब ये कत्तई नहीं कि समूल नष्ट कर दो। बस दिल के तार इस चेहरे से काट दो। रहना चाहो तो रहो नहीं तो रह कर भी नहीं रहना आपंको कोई जिंदगी भर के लिए सिखा गया है। Ghosts scare but ghosting is far more scary .....that too from human beings. * निराश न होइए।सीखिए। कई बार बातों बातों में दोस्त ऐसा कुछ बताते हैं । मैं खुद इस से कई बार गुजर चुकी हूं। सोचा आज पोस्ट लिखी जाए इसी पर।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें