भाषा / Language
ये बात देर से समझ आई कि इमोशनल नहीं इमोशनली इंटेलिजेंट होन…
✦
ये बात देर से समझ आई कि इमोशनल नहीं इमोशनली इंटेलिजेंट होना चाहिए। बुद्धू दिखना एक बात है होना दूसरी और बुद्धू बनते रहना तीसरी ,चौथी और पांचवी भी।
वही देखना चाहिए जो सामने वाला दिखा रहा हो। वह रूप नहीं देखना चाहिए जो तुम उस सामने वाले के लिए ख़्वाब में सोचते हुए आए हो। असल वाला पिक्चर ही हो शायद पिक्चर परफेक्ट न भी हो।
चश्मा बदल बदल कर देखना चाहिए ।लट्टू होना कोई बुरी बात नहीं तो कोई खास अच्छी बात भी नहीं।
लोगों को पढ़ना खासकर उन लोगों को पढ़ना जिसे मन में जगह देने की सोचा हो बेहद जटिल काम है।
हम किसी को पसंद करते हैं तो उसको नहीं उसकी परछाई को टटोलना चाहिए।कालापन उस में चिपका रहता है।
किसी से करीब होते हुए ,उसे दिल में जगह देते हुए हम बड़ा कैनवास देखते हैं ।सब कुछ निराला सब कुछ जादुई।
इस चाहना को पूरा करते हुए हम कई बार redflags को इग्नोर करते हैं। जानते हैं .....कुछ कम है। कुछ टीस रहा पर *कोई नहीं* कहकर आगे बढ़ते जाते हैं। ये *कोई नही ... कोई नहीं* कहना हमें एक ऐसे रिश्ते पर लाकर खड़ा कर देता है की एक रोज़ हम उसके *कोई नहीं* बन जाते हैं।
दरअसल हम अपने जहन में एक बेहद शानदार और यूनिक परसोना को लिए लिए फिरते हैं उसी से प्रेम करते हैं। हम उस परसोना को सच और उस करीबी की पर्सनैलिटी का मिलान करते ही नहीं।
फैक्चुअल और एक्चुअल का घोर अंतर दिखाई नहीं देता अक्सर प्रीत में
एक रोज़ समझ आता है कि दिखने वाला और जिसको देखा था जहन में मैच नहीं हो रहा। हम ठगे रह जाते हैं। ना हारने जैसा लगता है न रोने जैसा ।
लगता है अभी आंखें फोड़ लें।
मन की खाल उतार लें और दिमाग को सूली पर टांग दें।और ज़ोर से चिल्लाकर खुद को कहें...
उफ्फ.... I pity on you dear. U deserve this. You emotional fool.
Wasted yourself on petty soul.
* Invest in people but...invest soulfully.Be Emotional intelligent.
Fools that too emotional are not an in thing now a days.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें