कल्पनाशब्दों के बीच
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ऐसे क्यूं

ऐसे क्यूं.... कुछ भी बोले वो ....मन में घुलता है जाफरान रेखा भारद्वाज जी की आवाज़ के साथ पूरी छुट्टी गुज़ार दी। कुछ थकान कम हुई। कुछ मन नया हो गया। परतें खुल गई। गिरहें ढीली हो गईं। सुनिए....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें