कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4311

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हम सभी एक जगह पर रुककर भी हर पल चल रहे हैं

हम सभी एक जगह पर रुककर भी हर पल चल रहे हैं .... एक उम्मीद की तरफ *ये बात पहले मुझे प्रेम ने बताई फिर अप्रेम ने सिखाई। *Perhaps .... I stayed long... And that turned brutal.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें