कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4307

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जाइए आप कहां जाएंगे

जाइए आप कहां जाएंगे... ये नजर लौट के फिर आयेगी । रुके रहें मेरी ओर.... एक तय दूरी पर प्रेम बस दिशा पहचानता है दूरी मैं टाप लूँगी ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें