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ईश्वर एक रोज़ आपको उसके सामने जरूर खड़ा करता है जिसने आपको…

ईश्वर एक रोज़ आपको उसके सामने जरूर खड़ा करता है जिसने आपको एक रोज़ तोड़ कर रख दिया हो.... मैं फिर मिलूंगी....साबुत उस रोज़ प्रेम नहीं...मैं तुम्हारी आंखों में हैरत देखना चाहूंगी। मेरी आंखें तुम्हारा अप्रेम लौटा रही होंगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें