कल्पनाशब्दों के बीच
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परछाई से कौन पूछता है ....साथ चलोगी क्या

परछाई से कौन पूछता है ....साथ चलोगी क्या? तुम भी न पूछा करो। *बहुत आसान है तुम्हें याद करते रहना ... बेहद मुश्किल है ये कह पाना कि याद आते हो तुम। आज फिर तुम्हारी याद आई ... कहो कहां रखूं ये पंखुड़ियां?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें