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रचना 4277

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अच्छा हुआ तुमने मुझे एक बार में नहीं तोड़ा

अच्छा हुआ तुमने मुझे एक बार में नहीं तोड़ा... बारी बारी से टूटन दी। मेरे टूटने को प्रक्रिया सा रखा ...सतत तो अब मैं भी ये कह सकती हूँ... तुम मेरे प्रेम में हो... और मैं तुम्हारी क्रमशः हूँ ।
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