कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4276

भाषा / Language

इक सादगी ही है जो रंगों की मोहताज़ नहीं होती

इक सादगी ही है जो रंगों की मोहताज़ नहीं होती .... आईना मेरा खालिस प्रेमी है। न बदलता है। न बदलने को कहता है। उस आईने की उम्र नहीं बढ़ती पर वो खुशी खुशी मेरे रंग में ढल जाता है। मेरी उम्र पहन लेता है। कौन मुझे यूं प्यार करेगा जैसे तू करता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें