कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4269

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उदासी के अपने पैर नहीं होते ।

उदासी के अपने पैर नहीं होते । वो अक्सर प्रेम की पीठ पर सवार रहती है। प्रेम अपने प्रेमी पर बस वही थकान रख देता है... कभी देर तक कभी दूर तक *न कह पाने का दुख न सुन पाने के दुःख से कहीं अधिक होता है। न कहो तो लगता है मन में प्रेम का थक्का जम गया। लिख कर उसी थक्के को धमनियों में बहा देती हूं। मैं फिर नए सिरे से मुस्कुराने लगती हूं...। क्या किया जाय... तुम प्यारे ....और प्यारे लगते हो। अब जब तुमको देखती हूं तो खुद को *शाबाश कल्पना *कहने का मन करता है। और तुमको ........ सिर्फ़ शुक्रिया
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें