ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4242

भाषा / Language

इस दिलकश हंसी की गुनहगार अकेले मैं ही नहीं

✦
इस दिलकश हंसी की गुनहगार अकेले मैं ही नहीं .. कुसूर इसमें तुम्हारी बेरुखी का भी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें