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इस दिलकश हंसी की गुनहगार अकेले मैं ही नहीं

इस दिलकश हंसी की गुनहगार अकेले मैं ही नहीं .. कुसूर इसमें तुम्हारी बेरुखी का भी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें