कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4214

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तुमको पढ़ना शेष है

तुमको पढ़ना शेष है.... तुम्हारी कविताएं कारगर साबित नहीं होती । मन और चेहरे का मिलान कर नहीं पाती। तुमको वो लिखना चाहिए जो हुआ नहीं । जो तुम चाहते हो कि हो जाए। जो तुम हो वो लिखो कविता में एक तुमको देखने का मन है शब्द अक्षर रहित जो हुआ नहीं ... जो होने वाला है ... वो जो बस तुम्हारा मन जानता है अकल्पित वो लिखो मेरे लिए। कोई कविता मन नहीं पढ़ सकती न मेरा न तुम्हारा हां मन लिख सकती है मेरा भी तुम्हारा भी थक जाने के बाद। बर्बाद हो जाने के बाद। खुली आंख का सुख और बंद आंख का दुःख हो तुम मेरे ... तुमको मेरे लिए तो कभी कभी कुछ नहीं होना चाहिए। प्रेम भी नहीं। प्रेमी भी नहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें