भाषा / Language
आने और मिलने से कब आता है बसंत
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आने और मिलने से कब आता है बसंत...
प्रेम में पड़े दो व्यस्त लोगों के हिस्से आई सांझी तारीख है बसंत ।
ऐसे तुम मिले हो
ऐसे तुम मिले हो
गीत गुनगुना कर शाम जलाना है बसंत ।
किताब के उस मुड़े पन्ने से मोरपंख निकाल कर खुद पर तीन मनके उगा लेना... *विरह* लिखना है बसंत।
मुस्कुराना ...हर उदासी का लिफाफा बिना खोले फाड़ देना । बस तुम्हारा नाम बचा लेना है बसंत।
बिछोह का उत्सव है ...बसंत
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें