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तुम्हारा कांधा और वो हमारी तस्वीर भर ही तो है प्रेम
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तुम्हारा कांधा और वो हमारी तस्वीर भर ही तो है प्रेम....
बाक़ी सब तो...बस
रंग
अल्फ़ाज़
और ध्वनियाँ हैं।
*खुशबुएँ तो कई हैं मुझमें ....
तुम सही गुलाब तो चुनो
गुलाब नहीं.... मुझमें खिले तुम मुबारक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें