कल्पनाशब्दों के बीच
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वो और मैं

वो और मैं गजब प्रेमी लोग हैं.... देखे हुए ख़्वाब को बार बार देखते हैं हर बार देखते हैं। 😊😊😊 हर महीने लिखते हैं इश्क़... ये अलग बात है कि फरवरी में तड़के लगते है कुछ अधिक बघार होते हैं कुछ अलग खुश्बू आती है अलहदा ज़ायका रहता है ज्यादा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें