ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4176

भाषा / Language

दरवाज़ा खिड़की सा बनना चाहता था

✦
दरवाज़ा खिड़की सा बनना चाहता था .... खिड़की को हमेशा दरवाज़े ने हैरान रखा दोनों एक तय दूरी को कभी नाप नहीं पाए। बस आसक्त रहे । कभी घर को छोड़ कर नहीं गए। घर प्रेमिल रहा। मैं और तुम भी घर से तो हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें