भाषा / Language
जब किसी रोज़ तुम्हारी याद रखेंगे
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जब किसी रोज़ तुम्हारी याद रखेंगे
नीली नीली सफ़ेद पर बात रखेंगे
बेशक ज़मीं में दफन है वजूद मेरा
एक दिन तो असमानी औकात रखेंगे
धोरे रेत के और इत्तु सी एक ओस
दिलकश ऐसी कोई मुलाकात रखेंगे
एक चाँद और पूरे ढाई आखर
कम - कम में पूरी बारात रखेंगे
*जाने कब से लिख रही हूँ तुम्हें.....
भीड़ शब्दों की रखकर भी क्या करूँगी ?
तेरे नाम के अक्षर ही काफ़ी है पूरी कल्पना के लिए।
मेमोरीज़ में ये मिला
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें