कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4173

भाषा / Language

जब किसी रोज़ तुम्हारी याद रखेंगे

जब किसी रोज़ तुम्हारी याद रखेंगे नीली नीली सफ़ेद पर बात रखेंगे बेशक ज़मीं में दफन है वजूद मेरा एक दिन तो असमानी औकात रखेंगे धोरे रेत के और इत्तु सी एक ओस दिलकश ऐसी कोई मुलाकात रखेंगे एक चाँद और पूरे ढाई आखर कम - कम में पूरी बारात रखेंगे *जाने कब से लिख रही हूँ तुम्हें..... भीड़ शब्दों की रखकर भी क्या करूँगी ? तेरे नाम के अक्षर ही काफ़ी है पूरी कल्पना के लिए। मेमोरीज़ में ये मिला
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें