भाषा / Language
आज कॉफ़ी mugs के उन दो दिलों से फिर मिलना हुआ ।पिछली मुलाक़ात…
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आज कॉफ़ी mugs के उन दो दिलों से फिर मिलना हुआ ।पिछली मुलाक़ात की minutes of meetings उन्हें ज़बानी याद थी। दोस्त वो भी तो हैं तब से हमारे ।
लाख शुगर spoon से ऊपर बने दिल हिलाती रही पर वो क्या है ना.... ये कम्बख्त एक बार मिल जाते हैं तो फिर मिलते नहीं।
जाने कब "कॉफ़ी" उसकी कविता और मेरी मुस्कान पी गई।
दोस्ती भी क्या अजीब शय है।
घंटे भर बाद एहसास हुआ कि कॉफ़ी वाला दिल तो अब तक तैर ही रहा था ऊपरी सतह पर। mugs अब भी दिलकश लग रहे थे।
फिर .......जिंदगी ब्लैक कॉफी और वैनिला कॉफ़ी की कहानियां सुनाने लगी।
दोस्त बोलते रहे ... मुस्कुराते रहे ..... द्रवित हुए ..... हैरान भी हुए।
Minutes of meetings इस बार कॉफ़ी टेबल ने लिखे क्योंकि अब तक दिल तह में बैठ गए थे।
हम बाहर निकल आये । गहरी लंबी सांस ली ।
दोस्त थे इस लिए एक बार गले लग कर फिर मुस्कुराए।
अचानक कॉफ़ी वाले दिल मेरी साड़ी और उसके कोट पर लशकारे मारने लगे । हम विपरीत दिशाओं में चल दिये।
मुझे लगा उसने कहा...... ज़िन्दगी अभी एक घूंट ही पी है कल्पना ! अगली काफ़ी पर एक पन्ना और निचोड़ेंगे।
उसने भी शायद यही सुना होगा.....जल्द मिलते हैं !
तब तक ख्याल रखो। ज़िन्दगी गुलज़ार रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें