भाषा / Language
जो खुद से कहो वो फिर किसी से न कहो
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जो खुद से कहो वो फिर किसी से न कहो...
बस इतनी तवज्जो माँगता है इश्क़...
तुमने बचाये रखा प्रेम सुनामियों में भी ...
अब प्रेम तुम्हें सहेजे रखेगा हर बूँद में
*सफ़र में हूं । संग दो प्यारे लोगों की किताबें हैं।
मां के घर जा रही...हल्द्वानी ।
एक हफ़्ते मायके का सुख।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें