कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4150

भाषा / Language

जो खुद से कहो वो फिर किसी से न कहो

जो खुद से कहो वो फिर किसी से न कहो... बस इतनी तवज्जो माँगता है इश्क़... तुमने बचाये रखा प्रेम सुनामियों में भी ... अब प्रेम तुम्हें सहेजे रखेगा हर बूँद में *सफ़र में हूं । संग दो प्यारे लोगों की किताबें हैं। मां के घर जा रही...हल्द्वानी । एक हफ़्ते मायके का सुख।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें