कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4147

भाषा / Language

सारे उत्तर खारिज़ हो गए

सारे उत्तर खारिज़ हो गए.... तब भी .. एक प्रश्न में अपार जीवन बचा रह गया ठीक उसी मिट्टी से एक क्षण में बन गयीं तुम। तुम पर प्रश्नसूचक यूँ ही नहीं गढ़ा ईश्वर ने शीश से शीर्ष तक नख से नक्षत्र तक यक्ष प्रश्न बनी रहो.... अनवरत तुम्हारे लिए सारी प्रार्थनाएं स्थगित हैं ईश्वर से लेकर पुरुष तक के उत्तरों में। मौन प्रश्न कौन प्रश्न *सब कुछ ख़र्चने के बाद भी अपना नाम खुरचन से जरूर लिखती हूँ....... प्रेम से परे जाकर भी एक प्रेम करती हूँ..... तुमसे अविरल
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें